Siyasi Nama || चंदौली में बहनों के बीच पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद, पांच बहनों ने संपत्ति पर किया कब्जा तीन बहनों को किया बेदखल

चंदौली में बहनों के बीच पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद, पांच बहनों ने संपत्ति पर किया कब्जा तीन बहनों को किया बेदखल

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चंदौली में बहनों के बीच पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद, पांच बहनों ने संपत्ति पर किया कब्जा तीन बहनों को किया बेदखल

चंदौली में बहनों के बीच पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद, पांच बहनों ने संपत्ति पर किया कब्जा तीन बहनों को किया बेदखल पीड़िता ने लगाया बेदखली और मारपीट का आरोप पीड़ित पहुंचेगी एसपी कार्यालय लगाएगी न्याय की गुहार

ब्यूरो अशोक कुमार जायसवाल

चंदौली जनपद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पैतृक संपत्ति को लेकर सगी बहनों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। शशिकला शशि बाला मीनू नामक महिला ने अपनी ही पांच बहनों लगाया गंभीर आरोप पर घर से जबरन बेदखल करने और विरोध करने पर मारपीट का आरोप लगाया है। पीड़िता ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।

पीड़िता शशिकला शशि बाला और मीनू के अनुसार, उनकी आठ बहनें—चंदा देवी, रूबी भारती, पूजा, उजाला शशीकांती और (संभावित नाम)—एकजुट होकर उन्हें पैतृक घर से बाहर निकाल दी है। शशिकला उर्फ डिंपल का कहना है कि उनके परिवार में कोई भाई नहीं है और माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है। विवाह के बाद वह ससुराल चली गई थीं, लेकिन अब जब वह अपने मायके लौटीं तो उन्हें घर में रहने से रोका जा रहा है।

शशिकला ने आरोप लगाया कि उनकी बहनों ने जबरन उनके हिस्से की जमीन और मकान पर कब्जा कर लिया है। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस से की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

मामले को लेकर प्रार्थनी ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में लापरवाही बरत रहा है। आरोप है कि विपक्षी पक्ष का एक व्यक्ति पुलिस विभाग से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जिसके चलते पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही और कथित रूप से कब्जा कराने में मदद की जा रही है।

पीड़िता और उनके समर्थकों का कहना है कि यह मामला पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और शशिकला शशि बाला मीनू को उनके पैतृक घर में रहने का कानूनी अधिकार दिलाया जाए।

फिलहाल पीड़िता न्याय की आस में अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है और प्रशासनिक हस्तक्षेप का इंतजार कर रही है।

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